भारत का ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) सेक्टर तेजी से नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है। नैसकॉम और जिनोव की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक GCC सेक्टर का राजस्व करीब 98.4 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो दो साल पहले लगभग 65 अरब डॉलर था। देश में GCC की संख्या भी बढ़कर 2,117 तक पहुंच गई है। यह वृद्धि दिखाती है कि भारत अब केवल बैक-ऑफिस या सपोर्ट सेंटर नहीं रहा, बल्कि वैश्विक कंपनियों के लिए रणनीतिक, तकनीकी और इनोवेशन हब बनता जा रहा है। AI आधारित कार्यप्रणाली, उच्च कौशल वाले प्रोफेशनल्स और वैल्यू-ड्रिवन मॉडल ने भारत को इस क्षेत्र में नई पहचान दिलाई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के GCC अब केवल सेवा देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे वैश्विक उत्पाद, प्लेटफॉर्म और बिजनेस ऑपरेशंस की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। AI एक्सीलेंस सेंटर, विश्वविद्यालयों के साथ स्किल डेवलपमेंट साझेदारी और डोमेन एक्सपर्ट कर्मचारियों की उपलब्धता इस बदलाव की बड़ी वजह मानी जा रही है। नैसकॉम अध्यक्ष Rajesh Nambiar ने कहा कि भारत का GCC इकोसिस्टम बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है और AI इसमें उत्प्रेरक की भूमिका निभा रही है। आने वाले समय में GCC सेक्टर का फोकस बड़े पैमाने पर ऑपरेशन चलाने से ज्यादा बिजनेस रिजल्ट और इनोवेशन पर रहेगा।
रोजगार के मोर्चे पर भी यह सेक्टर बड़ी ताकत बनकर उभरा है। वर्तमान में GCC सेक्टर से करीब 23.6 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है। सबसे ज्यादा GCC केंद्र Bengaluru में हैं, जहां लगभग 34 प्रतिशत रोजगार आधारित है, जबकि Hyderabad दूसरे स्थान पर है। इसके अलावा Chennai और Pune भी प्रमुख GCC हब के रूप में उभर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले पांच वर्षों में भारत के करीब 75 प्रतिशत GCC ट्रांसफॉर्मेशन हब के रूप में विकसित हो सकते हैं, जिससे देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था और रोजगार क्षमता दोनों को बड़ा फायदा मिलेगा।