नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत बदले गए पाठ्यक्रम के बाद 9वीं कक्षा की नई एनसीईआरटी किताबों की भारी मांग सामने आई है। देश के कई राज्यों से छात्रों और अभिभावकों ने शिकायत की कि स्कूल खुलने के बावजूद उन्हें नई किताबें नहीं मिल पा रही हैं। इस मुद्दे पर बढ़ती चिंता के बीच एनसीईआरटी ने पहली बार आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि किताबों की कमी अस्थायी है और इसे जल्द दूर कर लिया जाएगा। संस्था के मुताबिक नए सिलेबस और डिजाइन के कारण किताबों की छपाई में समय लगा, लेकिन अब प्रिंटिंग का काम युद्ध-स्तर पर जारी है। एनसीईआरटी ने बताया कि लाखों प्रतियां तेजी से छापी जा रही हैं ताकि हर छात्र तक समय पर किताबें पहुंच सकें।
एनसीईआरटी अधिकारियों ने कहा कि इस बार 9वीं कक्षा के लिए पूरी तरह नई किताबें तैयार की गई हैं, जिनमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप बदलाव किए गए हैं। पाठ्यक्रम को अधिक गतिविधि-आधारित, कौशल-केंद्रित और आसान भाषा में तैयार किया गया है। संस्था का कहना है कि मांग अपेक्षा से कहीं ज्यादा बढ़ गई, जिसके चलते शुरुआती दिनों में सप्लाई प्रभावित हुई। हालांकि अब प्रिंटिंग प्रेस लगातार काम कर रहे हैं और राज्यों को तेजी से किताबें भेजी जा रही हैं। एनसीईआरटी ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए सभी नई किताबों के डिजिटल संस्करण पहले ही ऑनलाइन उपलब्ध करा दिए गए हैं।
छात्र और अभिभावक एनसीईआरटी की आधिकारिक वेबसाइट, DIKSHA ऐप और ePathshala प्लेटफॉर्म से मुफ्त में ई-बुक डाउनलोड कर सकते हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल विकल्प फिलहाल छात्रों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकते हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां किताबों की सप्लाई अभी नहीं पहुंची है। दूसरी ओर, कई स्कूलों ने भी छात्रों को फिलहाल ऑनलाइन सामग्री से पढ़ाई जारी रखने की सलाह दी है। एनसीईआरटी ने भरोसा दिलाया है कि अगले कुछ हफ्तों में स्थिति पूरी तरह सामान्य हो जाएगी और सभी छात्रों को नई किताबें आसानी से उपलब्ध होने लगेंगी।