केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) मातृभाषा आधारित शिक्षा की वकालत करती है। उन्होंने बताया कि समग्र शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय शिक्षा नीति और पीएम-श्री विद्यालय योजना आपस में जुड़ी हुई हैं तथा समग्र शिक्षा अभियान को भी नई शिक्षा नीति की सिफारिशों के अनुरूप ढाला गया है। उनके अनुसार मातृभाषा में शिक्षा देने से विद्यार्थियों की समझ, सीखने की क्षमता और बौद्धिक विकास को मजबूती मिलती है, इसलिए सरकार भारतीय भाषाओं को शिक्षा व्यवस्था के केंद्र में लाने का प्रयास कर रही है।
तमिलनाडु के संदर्भ में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि हाल ही में Supreme Court of India ने टिप्पणी की थी कि राज्य ने कुछ केंद्रीय शिक्षा योजनाओं तथा Jawahar Navodaya Vidyalaya नेटवर्क को पूरी तरह लागू नहीं किया है। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं को पूरी भावना और प्रतिबद्धता के साथ लागू किया जाना चाहिए ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के समान अवसर मिल सकें।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में शिक्षा राज्य मंत्री Sukanta Majumdar ने बताया कि भारत विदेशी छात्रों और शोधकर्ताओं को आकर्षित करने के लिए कई कार्यक्रम चला रहा है। इनमें Scheme for Promotion of Academic and Research Collaboration, Global Initiative of Academic Networks और Study in India जैसी पहलें शामिल हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
सुकांत मजूमदार ने यह भी जानकारी दी कि University Grants Commission ने विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ डबल डिग्री और ट्विन डिग्री कार्यक्रमों की अनुमति दी है, जो पहले उपलब्ध नहीं थे। इसके साथ ही भारतीय विश्वविद्यालय भी विदेशों में अपने परिसरों और शाखाओं की स्थापना कर रहे हैं। सरकार का मानना है कि इन पहलों से भारत वैश्विक शिक्षा केंद्र के रूप में उभरेगा और भारतीय छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा तथा शोध के अधिक अवसर प्राप्त होंगे।