संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी सांसदों से तथ्यपूर्ण, तर्कसंगत और सकारात्मक चर्चा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति स्वस्थ संवाद, रचनात्मक बहस और जनहित से जुड़े मुद्दों पर सार्थक विचार-विमर्श में निहित होती है। प्रधानमंत्री ने कहा, “जहाँ तथ्य और तर्क होते हैं, वहाँ तूफान के लिए कोई जगह नहीं होती।” उन्होंने उम्मीद जताई कि संसद का यह मानसून सत्र देश के विकास, जनकल्याण और राष्ट्रीय हित से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर एवं सकारात्मक चर्चा का मंच बनेगा। प्रधानमंत्री ने सांसदों से आग्रह किया कि वे जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप संसद की गरिमा बनाए रखें और सदन की कार्यवाही को सार्थक बनाने में सक्रिय योगदान दें। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने में सभी जनप्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और स्वस्थ संसदीय परंपराएँ ही लोकतंत्र को और सशक्त बनाती हैं। मानसून सत्र के दौरान आर्थिक विकास, सामाजिक कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, प्रौद्योगिकी, अवसंरचना, रोजगार तथा अन्य राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। ऐसे में सरकार और विपक्ष दोनों से रचनात्मक सहयोग की अपेक्षा की जा रही है, ताकि देशहित से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय प्रभावी ढंग से लिए जा सकें और लोकतंत्र के प्रति जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हो।