राजस्थान के जैसलमेर में भारतीय सेना ने एक बड़ा प्रदर्शन किया, जिसमें यह दिखाया गया कि कैसे नई और उभरती हुई तकनीकें रेगिस्तानी युद्ध में सेना की क्षमता को बढ़ा रही हैं। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य ऑपरेशनल तैयारियों, निर्णय लेने की क्षमता और युद्ध के दौरान स्थिति को समझने (situational awareness) को बेहतर बनाना था। इस दौरान सेना ने आधुनिक संचार प्रणाली, निगरानी उपकरण और बैटलफील्ड मैनेजमेंट सिस्टम जैसे कई हाई-टेक साधनों का उपयोग प्रदर्शित किया।
इस मौके पर साउदर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन ने जैसलमेर के अग्रिम इलाकों का दौरा किया और गोल्डन कतार डिवीजन की तैयारियों की समीक्षा की। उन्हें बताया गया कि कैसे नई तकनीकों को पारंपरिक सैन्य रणनीति के साथ जोड़कर Tactics, Techniques and Procedures (TTPs) को और प्रभावी बनाया जा रहा है। सेना अब युद्ध के बदलते स्वरूप को ध्यान में रखते हुए टेक्नोलॉजी आधारित युद्ध प्रणाली पर तेजी से काम कर रही है।
अधिकारियों ने डेमो के दौरान दिखाया कि रेगिस्तान जैसे कठिन इलाकों में भी आधुनिक तकनीक की मदद से सैनिक बेहतर निर्णय ले सकते हैं और ऑपरेशनल दक्षता बढ़ा सकते हैं। सेना प्रमुख ने जवानों के उच्च मनोबल, पेशेवर रवैये और कठिन परिस्थितियों में उनकी मेहनत की सराहना की। उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्धों में तकनीक और पारंपरिक कौशल का संतुलन बेहद जरूरी होगा। यह दौरा इस बात का संकेत है कि भारतीय सेना लगातार आधुनिकीकरण और तकनीकी बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रही है।