भारत के सेवा क्षेत्र (Services Sector) ने मई 2026 में मजबूत प्रदर्शन किया है। एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई (HSBC India Services PMI) बढ़कर 59.8 पर पहुंच गया, जो अप्रैल में 58.8 था। यह पिछले छह महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है और नवंबर 2025 के बाद सेवा क्षेत्र में सबसे तेज विस्तार को दर्शाता है। चूंकि पीएमआई का 50 से ऊपर रहना आर्थिक गतिविधियों में विस्तार का संकेत माना जाता है, इसलिए 59.8 का स्तर बताता है कि भारतीय सेवा क्षेत्र में मजबूती बनी हुई है। सर्वेक्षण के अनुसार यह तेजी मजबूत घरेलू मांग, नए ग्राहकों के जुड़ने और नए ऑर्डरों में लगातार वृद्धि की वजह से आई है। विशेष रूप से फ्रेट (माल ढुलाई), डिजिटल सेवाओं, ई-कॉमर्स, मनोरंजन और आईटी सेवाओं की मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे कंपनियों की कारोबारी गतिविधियां तेज हुईं।
एचएसबीसी की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के अनुसार, मई में नए कारोबार की मजबूत वृद्धि ने सेवा क्षेत्र को सहारा दिया। विदेशी मांग में भी अप्रैल की कमजोरी के बाद सुधार देखने को मिला। भारतीय कंपनियों को ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, हांगकांग, मलेशिया, संयुक्त अरब अमीरात और ब्रिटेन जैसे देशों से नए ऑर्डर प्राप्त हुए। हालांकि विदेशी मांग की वृद्धि अभी भी 2025 के औसत स्तर से कुछ कम रही, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कारोबार में सुधार का संकेत सकारात्मक माना जा रहा है। इसके साथ ही इनपुट लागतों में महंगाई की रफ्तार कुछ धीमी हुई, जिससे कंपनियों पर लागत का दबाव पहले की तुलना में कम रहा और कीमतों में बढ़ोतरी की गति भी जनवरी के बाद सबसे कम स्तर पर रही।
रोजगार के मोर्चे पर भी अच्छी खबर सामने आई। सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई और नौकरी सृजन की रफ्तार लगभग एक वर्ष की दूसरी सबसे तेज गति पर रही। हालांकि नई भर्ती करने वाली कंपनियों का अनुपात 7 प्रतिशत से कम रहा, फिर भी कुल रोजगार में वृद्धि दर्ज की गई। दूसरी ओर कंपनियों ने बताया कि खाद्य पदार्थों, ईंधन, गैस, श्रम और कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी जारी रही। भविष्य को लेकर भी कंपनियां आशावादी बनी हुई हैं और उन्हें उम्मीद है कि मजबूत मांग अगले 12 महीनों में उत्पादन और कारोबार को समर्थन देगी। हालांकि कारोबारी विश्वास तीन महीने के निचले स्तर पर आ गया है और यह अपने दीर्घकालिक औसत से नीचे बना हुआ है।
इसी दौरान कंपोजिट पीएमआई, जो विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और सेवा क्षेत्र दोनों का संयुक्त सूचकांक है, अप्रैल के 58.2 से बढ़कर मई में 59.3 पर पहुंच गया। इससे संकेत मिलता है कि भारत की समग्र निजी क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियां मार्च की सुस्ती से उबरकर फिर गति पकड़ रही हैं। नए ऑर्डरों में छह महीने की सबसे तेज वृद्धि और मजबूत मांग यह दर्शाती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था फिलहाल वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूती से आगे बढ़ रही है। सेवा क्षेत्र का यह प्रदर्शन आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और उपभोक्ता मांग के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।