पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई बाधाओं के कारण वैश्विक स्तर पर खाद (फर्टिलाइज़र) की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है। इसका सीधा असर भारत पर पड़ने की आशंका है, जहां खाद सब्सिडी बिल इस वित्तीय वर्ष में करीब 20% तक बढ़ सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दुनिया में कई प्रमुख फर्टिलाइज़र की कीमतें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं, जिससे सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
भारत सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए स्पष्ट किया है कि यूरिया, DAP और पोटाश जैसी खादों के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। यानी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के बावजूद किसानों को वही पुरानी दरों पर खाद मिलती रहेगी। इसका पूरा अतिरिक्त खर्च सरकार सब्सिडी के जरिए वहन करेगी। अधिकारियों के अनुसार, 2026 के लिए खाद सब्सिडी बजट लगभग 1.86 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जो पहले के अनुमान से ज्यादा है।
भारत की खाद प्रणाली काफी हद तक आयात पर निर्भर है, जिससे वैश्विक संकट का असर सीधे देश पर पड़ता है। भारत अपनी DAP की लगभग 60% जरूरत और यूरिया व अन्य फर्टिलाइज़र का बड़ा हिस्सा बाहर से मंगाता है। साथ ही फर्टिलाइज़र उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली LNG और कच्चे माल का भी बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है। ऐसे में वहां किसी भी तरह की रुकावट का असर सप्लाई और कीमत दोनों पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल किसानों पर सीधा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन सरकार के खजाने पर दबाव लगातार बढ़ता रहेगा और आने वाले समय में खाद्य सुरक्षा और कृषि लागत को लेकर चुनौतियां और गंभीर हो सकती हैं।