Indian Space Research Organisation (इसरो) ने भारतीय शोधकर्ताओं के लिए XPoSat मिशन के वैज्ञानिक डेटा तक पहुंच हेतु प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। यह पहल देश के वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है, जिसके माध्यम से शोधकर्ता ब्लैक होल, न्यूट्रॉन तारे और सक्रिय आकाशगंगीय नाभिक (Active Galactic Nuclei) जैसी ब्रह्मांड की जटिल एवं रहस्यमयी घटनाओं का अध्ययन कर सकेंगे। भारत का पहला समर्पित एक्स-रे पोलरिमेट्री उपग्रह XPoSat (एक्स-रे पोलरिमीटर सैटेलाइट) 1 जनवरी 2024 को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया था। यह मिशन अंतरिक्षीय स्रोतों से आने वाली एक्स-रे किरणों के ध्रुवीकरण (Polarisation) का अध्ययन करता है, जिससे वैज्ञानिकों को अत्यधिक ऊर्जावान खगोलीय घटनाओं की प्रकृति और ब्रह्मांड के मूलभूत भौतिक सिद्धांतों को समझने में सहायता मिलती है।
इसरो द्वारा 22 जून को शुरू की गई इस पहल के तहत देश के विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और युवा वैज्ञानिकों को विश्वस्तरीय अंतरिक्ष विज्ञान अनुसंधान में भागीदारी का अवसर मिलेगा। XPoSat से प्राप्त आंकड़े वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करेंगे कि ब्लैक होल के आसपास पदार्थ किस प्रकार व्यवहार करता है, न्यूट्रॉन तारों के शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र कैसे कार्य करते हैं और दूरस्थ आकाशगंगाओं से निकलने वाले उच्च-ऊर्जा विकिरण किस प्रकार उत्पन्न होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मिशन के डेटा को शोध समुदाय के लिए उपलब्ध कराने से भारत में खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष विज्ञान अनुसंधान को नई गति मिलेगी तथा युवा वैज्ञानिकों को वैश्विक स्तर के वैज्ञानिक अध्ययनों में योगदान देने का अवसर प्राप्त होगा। इसके साथ ही, यह पहल नई खोजों, नवाचारों और वैज्ञानिक क्षमता निर्माण को बढ़ावा देकर भारत को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में और अधिक सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।