वैश्विक इंजीनियरिंग कंपनी भारत में अपने निवेश और औद्योगिक उपस्थिति का विस्तार करने की योजना पर काम कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार कंपनी नागरिक विमानन क्षेत्र में इंजन रखरखाव, मरम्मत एवं ओवरहॉल (MRO) सुविधाओं के विकास, स्वदेशी सैन्य जेट इंजन कार्यक्रमों के लिए एयरो गैस टर्बाइन कॉम्प्लेक्स की स्थापना तथा परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) परियोजनाओं की संभावनाओं का अध्ययन कर रही है।
प्रस्तावित परियोजनाओं के साकार होने पर भारत में अरबों डॉलर का निवेश आकर्षित होने की संभावना है। साथ ही प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 10,000 से अधिक रोजगार अवसरों का सृजन हो सकता है। विमानन और रक्षा क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीकों के आगमन से भारतीय विनिर्माण क्षमता को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
नागरिक विमानन क्षेत्र में MRO सुविधाओं के विकास से भारत विदेशी रखरखाव सेवाओं पर निर्भरता कम कर सकेगा और घरेलू स्तर पर विमान इंजनों की मरम्मत एवं रखरखाव की क्षमता विकसित होगी। वहीं रक्षा क्षेत्र में एयरो गैस टर्बाइन कॉम्प्लेक्स की स्थापना स्वदेशी सैन्य जेट इंजन विकास कार्यक्रमों को नई गति दे सकती है, जो लंबे समय से भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल रहा है।
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) तकनीक को भविष्य की स्वच्छ और सुरक्षित ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि इस क्षेत्र में सहयोग आगे बढ़ता है, तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन क्षमता को भी बल मिल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं से "मेक इन इंडिया" और "आत्मनिर्भर भारत" अभियानों को महत्वपूर्ण समर्थन मिलेगा। तकनीक हस्तांतरण, उच्च कौशल विकास, स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं का विस्तार और उन्नत विनिर्माण क्षमताओं का विकास भारत को विमानन, रक्षा निर्माण और उन्नत ऊर्जा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायक हो सकता है। कुल मिलाकर, Rolls-Royce की संभावित निवेश योजनाएं भारतीय उद्योग और रोजगार क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण अवसर लेकर आ सकती हैं।