भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल व्यापार और स्टार्टअप इकोसिस्टम के बीच बेंगलुरु स्थित प्रमुख B2B स्टार्टअप कंपनी “उड़ान” एक बार फिर चर्चा में है। कंपनी अपने मौजूदा निवेशकों लाइटस्पीड और एम एंड जी से लगभग 50 से 60 मिलियन डॉलर की नई फंडिंग जुटाने को लेकर बातचीत कर रही है। करीब 1.8 बिलियन डॉलर के मूल्यांकन पर चल रही यह प्रक्रिया केवल एक कारोबारी निवेश नहीं, बल्कि भारतीय नवाचार, स्वदेशी उद्यमिता और आत्मनिर्भर भारत अभियान की मजबूती का प्रतीक मानी जा रही है। उड़ान ने छोटे व्यापारियों, किराना दुकानदारों और MSME क्षेत्र को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर देश में व्यापार की नई संस्कृति विकसित की है। इससे लाखों छोटे व्यापारियों को बाजार, सप्लाई और तकनीक तक आसान पहुंच मिली है। कंपनी की यह नई फंडिंग उसके विस्तार, तकनीकी सुधार और भविष्य में IPO की तैयारी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय स्टार्टअप्स में बढ़ता निवेश यह दर्शाता है कि दुनिया अब भारत की आर्थिक क्षमता, युवाओं की प्रतिभा और डिजिटल बाजार पर भरोसा कर रही है। ऐसे स्वदेशी स्टार्टअप्स केवल लाभ कमाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रोजगार निर्माण, डिजिटल सशक्तिकरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
इसी संदर्भ में स्वदेशी जागरण मंच द्वारा चलाया जा रहा “ऊर्जा बचत का स्वदेशी अभियान” भी समाज को आत्मनिर्भरता और जिम्मेदारी का संदेश दे रहा है। अभियान का मूल भाव है अपने से ही शुरू करें।” एक प्रेरक प्रसंग साझा करते हुए बताया गया कि 8, 9 और 10 मई को सवाई माधोपुर में स्वदेशी जागरण मंच की कार्यकर्ता बैठक आयोजित थी, जहां कार से जाने की योजना बनी थी। लेकिन चर्चा के दौरान यह विचार आया कि जब हम समाज से पेट्रोल-डीजल का कम उपयोग करने की अपील कर रहे हैं, तो शुरुआत स्वयं से करनी चाहिए। यही स्वदेशी चिंतन का वास्तविक स्वरूप है, जहां व्यक्ति पहले अपने व्यवहार में परिवर्तन लाकर समाज को दिशा देता है। स्वदेशी का अर्थ केवल देशी वस्तुओं का उपयोग नहीं, बल्कि संसाधनों की बचत, आत्मसंयम, स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देना भी है। आज जब देश ऊर्जा संकट, बढ़ते आयात और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब ऐसे छोटे-छोटे प्रयास बड़े परिवर्तन का आधार बन सकते हैं।
भारत में बढ़ते स्वदेशी स्टार्टअप्स और समाज आधारित स्वदेशी अभियानों का यह संगम आत्मनिर्भर भारत की मजबूत तस्वीर प्रस्तुत करता है। एक ओर तकनीक आधारित भारतीय कंपनियां वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रही हैं, वहीं दूसरी ओर सामाजिक संगठन लोगों में स्वदेशी जीवनशैली, ऊर्जा बचत और आर्थिक राष्ट्रवाद का भाव जागृत कर रहे हैं। इससे न केवल देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि युवाओं को नए अवसर, स्थानीय उद्योगों को नई शक्ति और भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में नई पहचान मिलेगी। आज आवश्यकता इस बात की है कि देश का प्रत्येक नागरिक स्वदेशी सोच को केवल विचार न मानकर अपने जीवन का व्यवहार बनाए, क्योंकि आत्मनिर्भर भारत का मार्ग समाज की सामूहिक भागीदारी और स्वदेशी चेतना से ही होकर गुजरता है।